प्यार में धोका

शाम होते ही चिरागों को बुझा देता हूँ

यह दिल ही काफ़ी है तेरी याद मैं जलने के लिए

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ई मेरे जुर्म गिनाने वाले

तेरे घर कोई आइना है क्या?

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हमने आपकी यद् मे सिगरेट जलाई

मगर कम्भाकत ढूएने भी तेरी तस्वीर बनाई.

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बेवफा होके जब चल ही दिए थे छोड़ के

क्यों मिल जाते हो कभी इस मोड़ पे, कभी उस मोड़ पे

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मैंने तुम्हारे यादों में रो रो के तुब भर दिया

मगर तुम इतनी बे-वफ़ा निकले की नहाके चल दिए.

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बेवफा सनम से तो सिग्रत्ती अची है,

बेवफा सनम से तो सिग्रत्ती एकही है ,

दिल जलती है, पर होतो से तो लगती है

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मैंने उनसे प्यार किया,

यह मेरे प्यार की हद थी.

मैंने उनपे इतबर किया,

यह मेरे इतबर की हद थी.

मरकर भी खुली रही मेरी आखें,

यह मेरे इंतिज़ार की हद थी.

One Response to “प्यार में धोका”

  1. वक़्त की रफ़्तार Says:

    वक़्त की रफ़्तार

    वक़्त अपनी रफ़्तार में मुझे भी ढलने दो
    मैं भी एक जर्रा हूँ तेरे लम्हे से गिरा हुआ |

    कितनी जल्दी है तुझे,कहाँ पहुँचना है बताओ
    तुम्हे भाग भाग कर पकड़ना नही होता मुझ से
    रुक जा कही,साँस तॉ लेलुँ ज़रा,खुद के खेल ना रचाओ
    तेरे कदमो से कदम मिला कर,कभी मुझे भी चलने दे

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