पती और पत्नी

एक इस्त्री को वोट डालने नही दिया गया, तो वह अपने पती को लेकर चुनाव

अधिकारी के पास गई/ जांच-पड़ताल के बाद पता चला की उस इस्त्री का नाम

मरे हुए लोगो की सूची में हैं तो वह चीखी,”क्या? में जिन्दी खडी हू और…/”

इस पर पति ने डाटा “जबान क्यो लड़ा रही हो, क्या इतने बड़े आदमी झूट बोलेंगे “

पति चिलालाकर बोला, जल्दी आओ, तुम्हे वह इस्त्री दिखाऊ जिसके पीछे

मदन पागल हैं”

पत्नी ने ऊपर जाकर देखा और बोली,”कहा हैं वह?”

पति बोला,”वह सामने हरा साल ओढे खडा हैं”

पत्नी बोली,”वह तो उसकी पत्नी हैं”

पति बोला,”मेंने कब इंकार कीया हैं”!!

हसीना शायरी

तू  कातिल  तेरा  दिल  कातिल

तेरे  गोरे  गाल  पे  कला  तिल  कातिल  हुम्हे  तोह  डर  है  जालिम  आपस  में  लड़  न  बेठे  तू  कातिल  में  कातिल……..

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दोस्त  तो  बहुत  मिलते  हैं  ज़माने  में

पर  हर  मोड़  पर  साचा  यार  नहीं  मिलता

यार  तो  बहुत  होते  हैं

दिल  लगाने  की

पर  हर  यार  से  सचा  प्यार  नहीं  मिलता

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दूऊऊऊओर्  से  देखा  तो  बारिश  हो  रही  थी,पाआआआअस्  जाकर  देखा  तो  “भींग  गए”.

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शाह  जहाँ  ने  ताज  महल  की  हर  दीवार  को  देखा,चार  मीनार  को  देखा  और  कहा  “माँ  कसम  कितना  खर्चा  हो  गया”.

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फूलों  से  क्या  दोस्ती  करते  हो  वह  तो  मुरझा  जाते  हैं,करना  है  तो  कांटो  से  दोस्ती  करो  जो  चुभ  कर  भी  याद  आते  हैं

शायरी

खुदा  ने  जब  तुम्हे  बनाया  होगा

तू  उससके  दिल  पे  एक  सरूर  चाय  होगा

सोचा  होगा  की  तुझको  जानत  में  रखूँ

फ़िर  उस्सको  मेरा  ख्याल  आया  होगा

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खुशबू  की  तरह  आपके  पास  बिखर  जायेंगे,

सकूं  बन  कर  दिल  में  उतर  जायेंगे,

महसूस  करने  की  कोशिश  तो  कीजिये,

दूर  होते  हुए  भी  पास  नज़र  आयेंगे

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वफ़ा  के  रंग  में  डूबी  हर  शाम  तेरे  लिए ,

यह  डगर, यह  नगर,मेरा  नाम  बस  तेरे  लिए,

तू  महेक्ति  रहे  चांदनी  रातों  की  तरह,

इस  नए  साल  का  पैगाम  तेरे  लिए

प्यार बीना जीना

प्यार  कमजोर  दिल  से  किया  नही  जा  सकता ,

ज़हर  दुश्मन  से  लिया  नही  जा  सकता,

दिल  में  बसी  है  उल्फत  जिस  प्यार  की

उस  के  बीना  जिया  नही  जा  सकता.

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साथ  रहते  रहते  यूहीं  वक्त  गुज़र  जाएगा

दूर  होने  के  बाद  कौन  किसे  याद  आएगा

जी  लो  ये  पल  जब  हुम्साथ  है

कल  का  क्या  पता, वक्त  कहाँ  ले  जाएगा

प्यार में धोका

शाम होते ही चिरागों को बुझा देता हूँ

यह दिल ही काफ़ी है तेरी याद मैं जलने के लिए

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ई मेरे जुर्म गिनाने वाले

तेरे घर कोई आइना है क्या?

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हमने आपकी यद् मे सिगरेट जलाई

मगर कम्भाकत ढूएने भी तेरी तस्वीर बनाई.

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बेवफा होके जब चल ही दिए थे छोड़ के

क्यों मिल जाते हो कभी इस मोड़ पे, कभी उस मोड़ पे

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मैंने तुम्हारे यादों में रो रो के तुब भर दिया

मगर तुम इतनी बे-वफ़ा निकले की नहाके चल दिए.

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बेवफा सनम से तो सिग्रत्ती अची है,

बेवफा सनम से तो सिग्रत्ती एकही है ,

दिल जलती है, पर होतो से तो लगती है

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मैंने उनसे प्यार किया,

यह मेरे प्यार की हद थी.

मैंने उनपे इतबर किया,

यह मेरे इतबर की हद थी.

मरकर भी खुली रही मेरी आखें,

यह मेरे इंतिज़ार की हद थी.

बेवफा….

 एक बेवफा के जख्मो पर….मरहम लगाने हम गए….
मरहम की कसम मरहम न मिला……मर हम गए……

तेरे शेर  विच  सारे अपने ही वस्दे ने,
सादे पिंड  वस्दे ने गैर…
जीने मिले सानु सब मिले दुःख देन वाले….किसी ने पौची साडी कैर….

एक छोटी-सी लव स्टोरी हैं

एक छोटी-सी लव स्टोरी हैं

मैं काला हूँ तू गोरी हैं

एक छोटी-सी लव स्टोरी हैं

मैं तेरा हूँ तू मेरी हैं

एक छोटी सी लव स्टोरी हैं

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अजी पहली बार कहा मिले थे हम

मिले क्या थे लड़ पड़े थे हम

हमने कहा था गलती तुम्हारी हैं

तुमने कहा था गलती हमारी हैं

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गलती किसी की भी हो बड़ी प्यारी हैं

एक छोटी सी लव स्टोरी हैं

मैं तेरा हू तू मेरी हैं

एक छोटी सी लव स्टोरी हैं

मैं काला हूँ तू गोरी हैं

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अजी आपका हाल केंसा हैं

जी बिल्कुल आपके जेसा हैं

थोडी-थोडी बेकरारी हैं

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जबसे देखा तुझको जब से

यह सब जारी हैं

एक छोटी सी लव स्टोरी हैं

मैं तेरा हूँ तू मेरी हैं

एक छोटी सी लव स्टोरी हैं

मैं काला हूँ तू गोरी हैं